कालसर्प दोष पूजा उज्जैन मुहूर्त और तिथि: अप्रैल 2026

अप्रैल 2026 का महीना ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है, तो इस महीने में उज्जैन में की गई कालसर्प दोष शांति पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

भारत की प्राचीन धार्मिक नगरी Mahakaleshwar Jyotirlinga में की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि भगवान शिव को काल के स्वामी “महाकाल” कहा जाता है। इसलिए कालसर्प दोष से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

अप्रैल 2026 में कालसर्प दोष पूजा के शुभ मुहूर्त कौन-कौन से है?

अप्रैल 2026 मे कालसर्प दोष पूजा के लिए कुछ विशेष तिथियाँ और समय अधिक शुभ माने जाते हैं। अप्रैल 2026 में भी कई ऐसे अवसर मिलते हैं जब यह पूजा विशेष फल देती है।

पूजा के लिए प्रमुख शुभ तिथियाँ निम्नानुसार है

अप्रैल में कालसर्प पूजा के लिए निम्न तिथियाँ उपयुक्त मानी जाती हैं:

  • सोमवार के दिन
  • प्रदोष तिथि
  • अमावस्या
  • मासिक शिवरात्रि

इन तिथियों पर भगवान शिव की आराधना करने से राहु-केतु के प्रभाव कम होने की मान्यता है।

कालसर्प दोष पूजा का श्रेष्ठ समय क्या है?

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा प्रायः सुबह के समय कराई जाती है।

  • सुबह का शुभ समय:
    6:00 AM – 10:30 AM
  • दोपहर का समय:
    11:30 AM – 1:30 PM
  • प्रदोष काल (शिव पूजा के लिए श्रेष्ठ):
    6:00 PM – 8:00 PM

हालाँकि सही मुहूर्त व्यक्ति की जन्म कुंडली के अनुसार तय किया जाता है।

मई 2026 में आपकी समस्या के अनुसार सर्वोत्तम तिथि का चयन

कालसर्प दोष पूजा के लिए तिथि का चुनाव केवल पंचांग देखकर नहीं होता — यह आपकी कुंडली, दोष के प्रकार और आपकी विशेष समस्या पर निर्भर करता है। फिर भी कुछ सामान्य दिशानिर्देश इस प्रकार हैं।

  • यदि आपके जीवन में सामान्य कालसर्प दोष है और आप सर्वश्रेष्ठ दिन चाहते हैं — तो निःसंदेह 16 मई (शनि अमावस्या) आपकी पहली पसंद होनी चाहिए।
  • यदि आपकी राहु महादशा चल रही है — तो 16 मई का राहुकाल (प्रातः 9–10:45 बजे) आपके लिए विशेष रूप से निर्धारित है।
  • यदि केतु महादशा चल रही है — तो 27 मई की पद्मिनी एकादशी आपके लिए सर्वोत्तम है क्योंकि केतु वैराग्य और मोक्ष का ग्रह है और एकादशी उस मार्ग को प्रशस्त करती है।
  • यदि विवाह में बाधा है — तो 15 मई का शुक्र प्रदोष सबसे अधिक प्रभावशाली है।
  • यदि पितृ दोष और कालसर्प दोष दोनों हों — तो 16 मई अमावस्या पर पितृ तर्पण के साथ कालसर्प पूजा एक ही दिन में दोनों समस्याओं का समाधान कर सकती है।
  • यदि व्यापार में बाधा है — तो 14 मई का गुरु प्रदोष आपके लिए उपयुक्त है।
  • यदि आप अपने पूर्वजन्म के पाप का प्रभाव महसूस कर रहे हैं और कर्म शुद्धि चाहते हैं — तो 27 मई की पद्मिनी एकादशी का अधिक मास संयोग आपके लिए है।

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा क्यों विशेष मानी जाती है?

भारत में कई स्थानों पर कालसर्प दोष पूजा होती है, लेकिन उज्जैन का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • महाकाल की नगरी: उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां की गई पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
  • पवित्र शिप्रा नदी : उज्जैन की Shipra River के तट पर स्नान और पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • वैदिक परंपरा: यहां के ब्राह्मण पीढ़ियों से वैदिक पद्धति से कालसर्प दोष शांति अनुष्ठान करते आ रहे हैं।

कालसर्प दोष पूजा की विधि क्या है?

कालसर्प दोष पूजा कई चरणों में पूरी की जाती है।

  • सबसे पहले व्यक्ति का नाम, गोत्र और जन्म विवरण लेकर पूजा का संकल्प लिया जाता है।
  • पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की आराधना से होती है।
  • नवग्रहों को प्रसन्न करने के लिए विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है।
  • राहु और केतु को शांत करने के लिए वैदिक मंत्रों का जाप कराया जाता है।
  • चांदी या तांबे के नाग-नागिन की पूजा की जाती है।
  • शिवलिंग पर दूध, जल, दही, घी, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया जाता है।
  • अंत में अग्नि में आहुति देकर पूजा पूर्ण की जाती है।
  • पूरी प्रक्रिया लगभग 2 से 3 घंटे तक चलती है।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ कौन-कौन से है?

यदि श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा की जाए तो व्यक्ति को कई लाभ मिल सकते हैं:

  • जीवन की बाधाएँ कम होती हैं
  • करियर में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं
  • विवाह में आ रही रुकावट दूर होती है
  • मानसिक शांति प्राप्त होती है
  • आर्थिक स्थिति में सुधार आता है
  • पारिवारिक सुख-शांति बढ़ती है

कालसर्प दोष पूजा के बाद क्या करें?

पूजा के बाद कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है।

क्या करें

  • प्रतिदिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
  • सोमवार को शिव मंदिर में जल चढ़ाएँ
  • हनुमान चालीसा का पाठ करें

क्या न करें

  • मांस और शराब से दूर रहें
  • झूठ और विवाद से बचें
  • नकारात्मक विचारों से दूर रहें

उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा कैसे कराएँ?

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है और जीवन में बार-बार समस्याएँ आ रही हैं, तो अप्रैल 2026 में उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा करवाना एक प्रभावी आध्यात्मिक उपाय हो सकता है।

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