पद्म कालसर्प दोष: जानें प्रभाव, उपाय और निवारण पूजा

पद्म कालसर्प दोष

पद्म कालसर्प दोष कालसर्प योग का एक प्रकार है, जो तब माना जाता है जब राहु पाँचवें भाव में और केतु ग्यारहवें भाव में हो और बाकी सातों ग्रह इनके बीच आ जाएं। नीचे जानिए इसका अर्थ, परंपरा में माने जाने वाले संकेत, उपाय और उज्जैन में शांति पूजा की जानकारी।

पद्म कालसर्प दोष क्या है?

पद्म कालसर्प दोष
पद्म कालसर्प दोष

कालसर्प योग तब कहा जाता है जब कुंडली के सातों ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही ओर हों। राहु जिस भाव में हो, उसके अनुसार 12 प्रकार बताए जाते हैं। पद्म कालसर्प दोष में राहु पाँचवें भाव में और केतु ग्यारहवें भाव में होते हैं।

ज्योतिष में पाँचवाँ भाव संतान, विद्या, बुद्धि और रचनात्मकता से जुड़ा माना जाता है और ग्यारहवाँ भाव आय, लाभ, मित्र और इच्छाओं की पूर्ति का भाव है। इसलिए पद्म योग को परंपरा में संतान, शिक्षा और आय या मित्रों से जुड़ी बातों के संदर्भ में देखा जाता है। ये परंपरागत मान्यताएं हैं और असर बाकी ग्रहों व दशा पर निर्भर करता है।

पद्म कालसर्प दोष के संकेत (परंपरा के अनुसार)

नीचे के संकेत सिर्फ परंपरागत मान्यताएं हैं, किसी एक संकेत से दोष सिद्ध नहीं होता:

  • संतान संबंधी: संतान के निर्णयों में देरी या चिंता की स्थिति (विस्तार से पढ़ें: संतान विलंब और विवाह बाधा)।
  • विद्या और बुद्धि: पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं में एकाग्रता बनाए रखने में कठिनाई।
  • आय और लाभ: ग्यारहवें भाव में केतु होने से प्रयास के अनुपात में लाभ न मिलने या आय में असंतोष का अनुभव।
  • मित्र और संबंध: मित्रों या नेटवर्क से अपेक्षित सहयोग न मिल पाना।
  • मन की स्थिति: निर्णय लेने में असमंजस या कभी-कभी अधिक अपेक्षाएं रखना।

कालसर्प योग के साथ भी कई लोग शिक्षा, व्यवसाय और परिवार में सफल रहते हैं। इसलिए इसे घबराने के बजाय कुंडली के पैटर्न की तरह समझना बेहतर है।

पद्म कालसर्प दोष के उपाय

परंपरा में निम्न उपाय बताए गए हैं:

  • मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” तथा राहु-केतु मंत्र (ॐ रां राहवे नमः, ॐ कें केतवे नमः) का नियमित जाप। हनुमान चालीसा का पाठ भी परंपरा में शुभ माना गया है।
  • दान और सेवा: काले तिल, उड़द की दाल या नीले वस्त्र का दान और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना।
  • व्रत और शिव अभिषेक: शनिवार या अमावस्या के दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल अर्पित करना।
  • नाग देवता की आराधना: नाग पंचमी या किसी शुभ दिन पर नाग देवता की पूजा, जिसमें चाँदी या पीतल के सर्प पर दूध, पुष्प और चंदन अर्पित किए जाते हैं।
  • रत्न: गोमेद (राहु) और लहसुनिया (केतु) जैसे रत्न बिना कुंडली देखे धारण न करें। पहले किसी जानकार ज्योतिषी से सलाह लें।

पद्म कालसर्प दोष निवारण पूजा

पद्म कालसर्प दोष की शांति के लिए परंपरा में विधिवत पूजा कराई जाती है। इसका उद्देश्य नाग देवता और भगवान शिव का आशीर्वाद लेना, राहु-केतु की शांति का संकल्प करना और मन में स्थिरता लाना है। यह पूजा उन लोगों के लिए बताई जाती है जिनकी कुंडली में राहु 5 वें और केतु 11 वें भाव में हो और बाकी सात ग्रह इनके बीच आते हों। पूजा तभी कराएं जब आपकी कुंडली का मिलान किसी जानकार से हो चुका हो।

उज्जैन को महाकाल की नगरी माना जाता है और यहाँ शिप्रा तट पर कालसर्प शांति पूजा की लंबी परंपरा है। इसी कारण कई श्रद्धालु यह पूजा उज्जैन में कराना चुनते हैं। पंडित योगेश व्यास जी पूजा शास्त्रीय विधि के अनुसार कराते हैं। पूजा की विधि यहाँ पढ़ें।

उज्जैन में पद्म कालसर्प दोष पूजा कैसे कराएं?

बुकिंग से पहले पंडित जी से अपनी कुंडली का मिलान कराएं, तिथि, पूजा सामग्री और समय की जानकारी पूछ लें, फिर बुकिंग पेज से या फोन पर पूजा बुक करें। संपर्क: पंडित योगेश व्यास, +91 9009320644।

अन्य प्रकारों की तुलना और पूरी जानकारी के लिए पढ़ें कालसर्प दोष क्या होता है। पूजा की तिथियां यहाँ और खर्च की जानकारी यहाँ देखें।

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