शंखपाल कालसर्प दोष: कारण, प्रभाव, उपाय और उज्जैन में निवारण पूजा

शंखपाल कालसर्प दोष

शंखपाल कालसर्प दोष कालसर्प योग का एक प्रकार है, जो तब माना जाता है जब राहु चौथे भाव में और केतु दसवें भाव में हो और बाकी सातों ग्रह इनके बीच आ जाएं। नीचे जानिए इसका अर्थ, परंपरा में माने जाने वाले संकेत, उपाय और उज्जैन में शांति पूजा की जानकारी।

शंखपाल कालसर्प दोष क्या है?

शंखपाल कालसर्प दोष
शंखपाल कालसर्प दोष

कालसर्प योग तब कहा जाता है जब जन्म कुंडली के सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही ओर हों। राहु जिस भाव में हो, उसके आधार पर इसके 12 प्रकार बताए जाते हैं। शंखपाल कालसर्प दोष में राहु चौथे भाव में और केतु दसवें भाव में होते हैं।

ज्योतिष में चौथा भाव घर, माता, सुख-शांति, वाहन, संपत्ति और शिक्षा से जुड़ा माना जाता है, जबकि दसवाँ भाव कर्म, करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा का भाव है। इसलिए इस योग को परंपरा में घरेलू स्थिरता और कार्यक्षेत्र के बीच संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। ये सामान्य परंपरागत मान्यताएं हैं, किसी की कुंडली में असर बाकी ग्रहों और दशा पर निर्भर करता है।

शंखपाल कालसर्प दोष के संकेत (परंपरा के अनुसार)

नीचे के संकेत सिर्फ परंपरागत मान्यताएं हैं। अकेले इनमें से कोई भी बात दोष का प्रमाण नहीं है और ये अन्य कारणों से भी हो सकती हैं:

  • घर और मन की शांति: चौथे भाव में राहु होने से घर में बेचैनी, बार-बार घर बदलने की स्थिति या माता के स्वास्थ्य और संबंधों को लेकर चिंता रहने की बात कही जाती है।
  • संपत्ति और वाहन: घर, ज़मीन या वाहन से जुड़े निर्णयों में देरी या उलझन।
  • शिक्षा: पढ़ाई में एकाग्रता की कमी या बीच में रुकावट का अनुभव।
  • करियर और प्रतिष्ठा: दसवें भाव में केतु होने से काम में मन न लगना, अपेक्षित पहचान न मिलना या करियर की दिशा को लेकर असमंजस।
  • संबंध: कार्यक्षेत्र में सहयोगियों या वरिष्ठों से तालमेल बैठाने में कठिनाई।

कई लोगों की कुंडली में कालसर्प योग होते हुए भी जीवन में अच्छी सफलता मिलती है। इसलिए इसे डर की तरह नहीं, बल्कि कुंडली के एक पैटर्न की तरह समझें, जिसके लिए शांति की परंपरा है।

शंखपाल कालसर्प दोष के उपाय

परंपरा में नीचे दिए गए सरल उपाय बताए गए हैं। इन्हें श्रद्धा और नियम के साथ करना ही मुख्य बात मानी जाती है:

  • मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” तथा राहु-केतु मंत्र (ॐ रां राहवे नमः, ॐ कें केतवे नमः) का नियमित जाप। हनुमान चालीसा का पाठ भी परंपरा में शुभ माना गया है।
  • दान और सेवा: काले तिल, उड़द की दाल या नीले वस्त्र का दान और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना।
  • व्रत और शिव अभिषेक: शनिवार या अमावस्या के दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल अर्पित करना।
  • नाग देवता की आराधना: नाग पंचमी या किसी शुभ दिन पर नाग देवता की पूजा, जिसमें चाँदी या पीतल के सर्प पर दूध, पुष्प और चंदन अर्पित किए जाते हैं।
  • रत्न: गोमेद (राहु) और लहसुनिया (केतु) जैसे रत्न बिना कुंडली देखे धारण न करें। पहले किसी जानकार ज्योतिषी से सलाह लें।

शंखपाल कालसर्प दोष निवारण पूजा

शंखपाल कालसर्प दोष की शांति के लिए परंपरा में विधिवत पूजा कराई जाती है। इसका उद्देश्य नाग देवता और भगवान शिव का आशीर्वाद लेना, राहु-केतु की शांति का संकल्प करना और मन में स्थिरता लाना है। यह पूजा उन लोगों के लिए बताई जाती है जिनकी कुंडली में राहु 4 वें और केतु 10 वें भाव में हो और बाकी सात ग्रह इनके बीच आते हों। पूजा तभी कराएं जब आपकी कुंडली का मिलान किसी जानकार से हो चुका हो।

उज्जैन को महाकाल की नगरी माना जाता है और यहाँ शिप्रा तट पर कालसर्प शांति पूजा की लंबी परंपरा है। इसी कारण कई श्रद्धालु यह पूजा उज्जैन में कराना चुनते हैं। पंडित योगेश व्यास जी को पूजा-अनुष्ठान में 20+ वर्षों का अनुभव प्राप्त है और वे पूजा शास्त्रीय विधि के अनुसार कराते हैं। पूजा की विधि यहाँ पढ़ें।

उज्जैन में शंखपाल कालसर्प दोष पूजा कैसे कराएं?

बुकिंग से पहले पंडित जी से अपनी कुंडली का मिलान कराएं, तिथि, पूजा सामग्री और समय की जानकारी पूछ लें, फिर बुकिंग पेज से या फोन पर पूजा बुक करें। संपर्क: पंडित योगेश व्यास, +91 9009320644।

अन्य प्रकारों की तुलना और पूरी जानकारी के लिए पढ़ें कालसर्प दोष क्या होता है। पूजा की तिथियां यहाँ और खर्च की जानकारी यहाँ देखें।

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