शंखचूर्ण कालसर्प दोष: जाने इसके प्रभाव, लक्षण और उपाय
शंखचूर्ण कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में राहु नवम (9वें) भाव में और केतु तृतीय (3वें) भाव में स्थित होते हैं, तथा सभी ग्रह इन दोनों के मध्य में आ जाते हैं यह स्थिति “शंखचूड़ कालसर्प योग” कहलाती है। कालसर्प दोष वैदिक ज्योतिष में एक गंभीर योग माना जाता है, जो राहु और…